दीपक 'कुल्लुवी' की कलम से.................

मेरे गम से न रख रिश्ता मगर अपना मुझे दे दे, अपने दर्द के लम्हे हमारे नाम तू कर दे ,हम इतने भी नहीं बुजदिल जो डर जाएँगे इतने में, न हो हमपे यकीं ऐ-दोस्त तो मेरी जान भी ले ले

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कुर्सी

Posted On: 21 Jul, 2012 Others में

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कुर्सी

राष्ट्रपति की कुर्सी पर

छिड़ गया महा संग्राम

माया,ममता.सोनिया मुलायम
सब चलें शतरंज की चाल
प्रणव,कलाम में रस्सा कस्सी
हो सकती है प्यारे
आज फैसला आने वाला है
किसके चमकेंगे सितारे
दीपक कुल्लुवी

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
July 21, 2012

कलाम तो बीच में हैं ही नहीं महोदय.

    deepaksharmakuluvi के द्वारा
    July 21, 2012

    it was written few days ago when the name of Kalam Sahib was on-top


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