दीपक 'कुल्लुवी' की कलम से.................

मेरे गम से न रख रिश्ता मगर अपना मुझे दे दे, अपने दर्द के लम्हे हमारे नाम तू कर दे ,हम इतने भी नहीं बुजदिल जो डर जाएँगे इतने में, न हो हमपे यकीं ऐ-दोस्त तो मेरी जान भी ले ले

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गोविन्दपुरी मैट्रो स्टेशन का दर्द, ऑटो चालकों का आतंक,गंदगी और परेशानियाँ रिपोर्ट : दीपक शर्मा कुल्लुवी'

Posted On: 30 Jul, 2012 Others में

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गोविन्दपुरी मैट्रो स्टेशन का दर्द, ऑटो चालकों का आतंक,गंदगी और परेशानियाँ

रिपोर्ट : दीपक शर्मा कुल्लुवी’ (दिल्ली व्यूरो )

गोविन्दपुरी मैट्रो स्टेशन बने  हुए अधिक समय  भी नहीं हुआ  है फिर भी पार्किंग के आस पास  गँदगी नें यहाँ अपनें पैर पसारने शुरू कर दिए हैं I साफ सफाई का खास ख्याल नहीं रखा जा रहा है I अभी से ही इस बात  पर ध्यान नहीं दिया गया तो धीरे धीरे चारों और गंदगी फैलते देर नहीं लगेगी I एक्सलेटर के नीचे  की ख़ाली जगह को लोगों नें खुले  मूत्रालय में बदल दिया है जिससे गंदगी और बदबू  तो फ़ैल ही रही है उससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि आसपास गुज़रती लड़कियों,औरतों को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है क्योंकि मर्द तो बेशर्मों कि तरह सरेआम पेशाब करते नज़र आते हैं उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है I मेनहोल के ढक्कन खुले नज़र आते हैं  कभी भी  कोई दुर्घटना हो सकती है
इसके एक्सलेटर पर सरकारी  स्कूल के  बच्चों के झुण्ड के झुण्ड ऊपर नीचे झूले झूटते रहते हैं उन्हें रोकने वाला  कोई नहीं I इसलिए  इसे ख़राब होनें में देर नहीं लगेगी और दुर्घटना  भी हो सकती है I नई दुल्हन के हार श्रृंगार में तो कोई कमीं नहीं होनी चाहिए लेकिन यहाँ ऐसा नहीं लगता I चारों तरफ  जूस,कचौरी,खाने,पान बीड़ी वाली रेहड़ियों की भरमार लग गई है हर तरफ बस भीड़ भड़क्का I

सरकार को चाहिए की गोविंदपुरी  मैट्रो स्टेशन पर नजदीक  के  इलाकों जैसे संगम बिहार,तारा अपार्टमेंट,गोविन्दपुरी,ग्रेटर  कैलाश-2 डी० डी० ए0 फ़्लैट ,ओखला  को कबर करने के लिए फीडर बसें चलाए क्योंकि गोविंदपुरी मैट्रो स्टेशन बनते ही ऑटो वालों की तो मौज हो गई जो अच्छी बात है पर साथ में उनका आतंक उनकी मनमानी भी शुरू हो गयी I ऑटो वाले यात्रियों को परेशान भी  करने  लग गए हैं पुराने पीले रंग वाले और ग्रामीण सेवा वाले सफ़ेद रंग के ऑटो जो अभी हाल में ही चलने शुरू हुए हैं उनमें एक सवारी की जगह आगे और छह सवारियों की जगह पीछे होती है लेकिन ओटो वाले आलू प्याज की तरह ग्यारह,बारह सवारियां भरते हैं जिससे सवारियों को बैठने में बहुत दिक्कत होती है जब तक आठ लोग पीछे बैठ न जाएँ वह चलने को तेयार ही नहीं होते दूसरा यह ऑटो  वाले सवारियों से मनमाना किराया बसूल  करते हैं स्टेशन से  तारा अपार्टमेंट दो  किलोमीटर भी नहीं है बस का  किराया भी पाँच रूपए है लेकिन यह ओटो वाले दस रूपये बसूस करते हैं I कोई देनें से इंकार करता है तो उससे बहस बाजी करते हैं उलझते हैं I  ट्रैफिक पुलिस भी कुछ नहीं कर पाते सवारियों की परेशानियों से उन्हें क्या लेना देनां I उनसे उन्हें क्या फायदा  बेचारी  सवारियां जैसे तैसे  परेशानी में सफ़र करने को मजबूर हैं उनकी सुनने वाला य उनकी सुध  लेने वाला  कोई नहीं है
हलकी सी वरिश हो जाये तो यहाँ आसपास  की सड़कें स्वीमिंग पूल में परिवर्तित हो जाती हैं सही निकास की कोई उचित व्यवस्था नहीं हर तरफ पानी भर जाता है जिससे लोगों को बहुत परेशानियों से गुज़ारना पड़ता है I
उपरलिखित परेशानियों को दर्शाती तस्वीरें इस  खबर की सच्चाई की खुद गवाह हैं I
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepaksharmakuluvi के द्वारा
July 31, 2012

dhanyabad SHUKRIYA………..

phoolsingh के द्वारा
July 31, 2012

सही कहा सर, हम भी इसके भुक्तभोगी है………..ये हालत दर-ब-दर ख़राब ही होते जा रही है………………फूल सिंह


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