दीपक 'कुल्लुवी' की कलम से.................

मेरे गम से न रख रिश्ता मगर अपना मुझे दे दे, अपने दर्द के लम्हे हमारे नाम तू कर दे ,हम इतने भी नहीं बुजदिल जो डर जाएँगे इतने में, न हो हमपे यकीं ऐ-दोस्त तो मेरी जान भी ले ले

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मान जाते तो

Posted On: 30 Jul, 2012 Others में

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मान जाते तो

ऐन० डी० तिवारी जी की क्यों मति मारी
बुढ़ापे में इतनी मुसीबत ली भारी
कुकर्म किया था तो मान जाते पहले
डी० ऐन० ए० टैस्ट की न आती बारी
ऐश की जवानी में लूटे मज़े
अब बुढ़ापे में चेहरे के बारह बजे
अब कैसे दिखाएँगे अपनों को मुँह
कहाँ जाती बहार में मिलेगा सकूँ
इज्जत गई,शौहरत गई
अदालत के चक्कर लगाने पड़े
शान अपनी झूठी दिखाने को यारो
झूठे बहाने बनाने पड़े
कहता है रोहित नाज़ायज है बाप
जनता,अदालत है रोहित के साथ
जाता बुढ़ापा कई दर्द दे गया
भुगतेंगे सज़ा वह अब अपने आप

दीपक शर्मा ‘कुल्लुवी’
30 जुलाई 2012 .

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

phoolsingh के द्वारा
July 30, 2012

अच्छा है सर…………..


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