दीपक 'कुल्लुवी' की कलम से.................

मेरे गम से न रख रिश्ता मगर अपना मुझे दे दे, अपने दर्द के लम्हे हमारे नाम तू कर दे ,हम इतने भी नहीं बुजदिल जो डर जाएँगे इतने में, न हो हमपे यकीं ऐ-दोस्त तो मेरी जान भी ले ले

163 Posts

100 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 11887 postid : 138

न रख रिश्ता

Posted On: 28 Aug, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मेरे ग़म से न रख रिश्ता

बहुत देता है दर्द-ओ-ग़म

खुशियाँ ले लो तुम हमसे
हमें ही सहने दो यह ग़म

दीपक ‘कुल्लुवी’

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepaksharmakuluvi के द्वारा
August 28, 2012

shukriya janaw

manoranjanthakur के द्वारा
August 28, 2012

बहुत सुंदर चार लाइना बधाई


topic of the week



latest from jagran