दीपक 'कुल्लुवी' की कलम से.................

मेरे गम से न रख रिश्ता मगर अपना मुझे दे दे, अपने दर्द के लम्हे हमारे नाम तू कर दे ,हम इतने भी नहीं बुजदिल जो डर जाएँगे इतने में, न हो हमपे यकीं ऐ-दोस्त तो मेरी जान भी ले ले

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आजमाईश

Posted On: 1 Sep, 2012 Others में

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आजमाईश

न ख्वावों पे कर भरोसा कमबख्त टूट भी सकते है
और न यकीं दोस्तों पे कमबख्त लूट भी सकते हैं
हम यूँ ही नहीं कहते आजमाईश की है यारो
रिश्ते आज जो अपने से लगे ,कल छूट भी सकते हैं

दीपक शर्मा ‘कुल्लुवी’

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

MAHIMA SHREE के द्वारा
September 1, 2012

वाह वाह बहुत ही बढ़िया .. आदरणीय कुल्लुवी’ जी

    deepaksharmakuluvi के द्वारा
    September 1, 2012

    THANKS MAHIMA HOW ARE YOU I PUBLISHED YOUR NEWS OF MUZAFFARNAGAR KAVI SAMELAN DON;T KNOW YOU DID SEE IT OR NOT. KULUVI


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