दीपक 'कुल्लुवी' की कलम से.................

मेरे गम से न रख रिश्ता मगर अपना मुझे दे दे, अपने दर्द के लम्हे हमारे नाम तू कर दे ,हम इतने भी नहीं बुजदिल जो डर जाएँगे इतने में, न हो हमपे यकीं ऐ-दोस्त तो मेरी जान भी ले ले

163 Posts

100 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 11887 postid : 218

इंसानियत का फ़र्ज़

Posted On: 31 Oct, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

इंसानियत का फ़र्ज़

डेंगू  का कहर देखकर
बेचारे मच्छर भी शरमा गए
अपनें तो पीछे हट गए
बेचारे मच्छर मदद को आ गए
कहनें लगे ना घबराना
हम इंसानियत का फ़र्ज़ ज़रूर निभाएँगे
आपके अपनें तो धोखा दे गए
हम ब्लड डोनेशन को ज़रूर आएँगे
अपना खून देकर भी
हम आपको ज़रूर बचाएँगे
जितना आपसे निकाला था
उससे दुगुना देकर जाएंगे
अपनी तो मज़बूरी थी
ना पीते तो कैसे जीते
लेकिन आपकी खातिर हम
बिन पिए मर जाएंगे
लेकिन आपके अपनों की तरह
पीठ नहीं दिखाएँगे
बहाने नहीं बनाएँगे
यह वादा है हमारा
आपको ज़रूर बचाएँगे
आपको ज़रुर——–

‘दीपक शर्मा कुल्लुवी

खबर:-डेंगू  और डेंगी का कहर समूचे भारत में I

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepaksharmakuluvi के द्वारा
October 31, 2012

धन्यवाद

Santlal Karun के द्वारा
October 31, 2012

व्यंग्य कविता, प्रभावपूर्ण; साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! “लेकिन आपके अपनों की तरह पीठ नहीं दिखाएँगे बहाने नहीं बनाएँगे यह वादा है हमारा आपको ज़रूर बचाएँगे”


topic of the week



latest from jagran