दीपक 'कुल्लुवी' की कलम से.................

मेरे गम से न रख रिश्ता मगर अपना मुझे दे दे, अपने दर्द के लम्हे हमारे नाम तू कर दे ,हम इतने भी नहीं बुजदिल जो डर जाएँगे इतने में, न हो हमपे यकीं ऐ-दोस्त तो मेरी जान भी ले ले

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अँधा कानून

Posted On: 22 Nov, 2012 Others में

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अँधा कानून

कुकर्मों का हो गया हिसाब
फाँसी पर लटके मियां ‘कसाव’
खुद भी मरे बेगुनाहों को मारा
जिंदगी अपनीं  की बर्वाद
पाप करके कोई बच नहीं सकता
कोई जख्म किसी के भर नहीं सकता
आखरी लम्हों में गुनहगारों को भी
रब्ब आता है याद
कानून भी अपना इतना लचीला
करोड़ों का खज़ाना कर दिया ढीला
इक आतंकी को सज़ा  देनें के लिए
लगा दिए इतने साल

दीपक कुल्लुवी
21-11-12

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

phoolsingh के द्वारा
November 22, 2012

शर्मा जी नमस्कार……. सच्चाई की जीत को उजागर करता एक सुंदर रचना……. फूल सिंह

    deepaksharmakuluvi के द्वारा
    November 22, 2012

    शुक्रिया दोस्त


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