दीपक 'कुल्लुवी' की कलम से.................

मेरे गम से न रख रिश्ता मगर अपना मुझे दे दे, अपने दर्द के लम्हे हमारे नाम तू कर दे ,हम इतने भी नहीं बुजदिल जो डर जाएँगे इतने में, न हो हमपे यकीं ऐ-दोस्त तो मेरी जान भी ले ले

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दगावाज़ ए0 टी0 एम0

Posted On: 6 Dec, 2012 Others में

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दगावाज़ ए0 टी0 एम0
रिपोर्ट : दीपक ‘कुल्लुवी’  देहली

कृष्णा कालौनी गली न0 3 सेहतपुर,फरीदाबाद  हरियाणा  निवासी श्री नागेश्वर जी को सी0 लाल चौक गोविंदपुरी नई  दिल्ली स्थित  पंजाब नैशनल बैंक का  एक नामुराद ए0 टी0 एम0 धोखा दे गया उन्होंने जैसे ही कार्ड डाला और दस हज़ार रूपए निकालने  के लिए बटन दवाया तो स्क्रीन साफ हो गई लेकिन पैसे नहीं निकले अब खुदा जाने मशीन ख़राब हो गई या नैटवर्क फेल हो गया I   इस बात की शिकायत उसने बैंक अधिकारीयों से की उनका कहना था कि दस हज़ार रुपए निकले हैं  I नागेश्वर का कहना है की जब वोह बाहर  निकला था तो दो लड़के आए थे और जैसे ही उन्होंने अपना कार्ड डाला एकदम पैसे निकले जिन्हें लेकर दोनों चले गए फिर नागेश्वर नें जैसे ही दुवारा अपना कार्ड डालकर अपना बैलेंस देखा तो हक्का बक्का रहा गया यह देखकर की उसके खाते से दस हज़ार रूपये निकल चुके थे उनका खाता स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद नेहरू प्लेस नै दिल्ली में है खाता  न0 है 62046995183
अब यह किसकी गलती मानी  जाए संभवता वोह दो लड़के जो बाद में आए उन्हें ही यह पैसे मिल गए होंगे  क्या ऐसे में यह उस बैक की ज़िम्मेदारी नहीं बनती जिसका यह ए0  टी0 एम0 था कि  सी0 सी0 टी0 वी0  फुटेज खँगालते तो  आसानी से पता चल जाता उन लडकों का I  लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ I  बेचारे गरीब नागेश्वर की सुनने वाला कोई नहीं किसको अपना दुखड़ा सुनाए  किसके सामने रोना  रोए बैक ने तो बस यह कहकर अपना पल्ला झाड़ किया की पैसे तो निकल गए उसने लिखकर भी शिकायत की लेकिन लेकिन कोई  सुनवाई  नहीं I
अगर ए0 टी0 एम0 की स्क्रीन साफ़  न हो जाती तो यह हादसा नहीं होता मशीन की खराबी से ही दस हज़ार  महीना  पगार पाने वाला गरीब नागेश्वर इसका  शिकार बन गया I
बैंक को हर हाल  में इसकी सहायता करनी चाहिए वर्ना लोगों का ए0  टी0 एम0 से विश्वास ही उठ जाएगा I

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mayankkumar के द्वारा
December 6, 2012

आपका लेख पढ़ कृतज्ञ हुआ ….. हमारे ब्लाॅग तक भी जावें …. !!

    deepaksharmakuluvi के द्वारा
    December 6, 2012

    धन्यबाद सर


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