दीपक 'कुल्लुवी' की कलम से.................

मेरे गम से न रख रिश्ता मगर अपना मुझे दे दे, अपने दर्द के लम्हे हमारे नाम तू कर दे ,हम इतने भी नहीं बुजदिल जो डर जाएँगे इतने में, न हो हमपे यकीं ऐ-दोस्त तो मेरी जान भी ले ले

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फाँसी से कम नहीं )

Posted On: 19 Dec, 2012 Others में

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फाँसी से कम नहीं )

इन्हें फाँसी  पर लटका दो

या गोलियों से मरवा दो

बलात्कारियों की रूह काँप जाए

इन्हें ऐसी कड़ी सजा दो

इन दरिंदों को जिंदा न छोड़ो

पहले इनके हाथ पाँव तोड़ो

जिंदा सूली पर लटका दो

लाश चील कव्वों को खिला दो

इनके घिनोने जुर्म की

और सज़ा  न कोई

शर्मसार है भारत माँ

माएँ फूट फूट कर रोई

हद कर दी हैवानियत की

जली होली  इंसानियत की

कड़े कर दो कानून नियम

जलाओ चिता शैतानियत की

दिल में दर्द है आँखे नम

चारों तरफ है ग़म ही ग़म

दुआ को उठ रहे हाथ करोड़ों

वेशर्मों को न कोई शर्म

खुश हो रस्सी खेंचूँगा मैं

इक पैसा तक न लूँगा मैं

मुफ्त में अपनी सेवा दूँगा

जल्लाद बनने को हूँ तेय्यार

दीपक ‘कुल्लुवी’

18-12-12

खबर :- दिल्ली में पाँच बदमाशों नें लड़की से गैंगरेप किया लड़की सीरियस I

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

utkarshsingh के द्वारा
December 23, 2012

भावुक रचना |

yatindranathchaturvedi के द्वारा
December 22, 2012

संवेदनशील

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 20, 2012

वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.


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